रामपुर – आजमगढ़ में वोटिंग कल, अखिलेश-आजम की सपा का लाल-किला बचेगा या योगी लहराएंगे भाजपा का भगवा ?

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उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कब्जे वाली दो लोकसभा सीट रामपुर और आजमगढ़ में गुरुवार को उप-चुनाव के लिए मतदान होना है। रामपुर सीट आजम खान के इस्तीफे से खाली हुई थी जबकि आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने इस्तीफा दे दिया था। दोनों अब यूपी विधानसभा के सदस्य बन गए हैं। रामपुर में सपा और भाजपा के बीची सीधी लड़ाई है क्योंकि बसपा नहीं लड़ रही है। आजमगढ़ में बीजेपी, एसपी के मुकाबले में बीएसपी का त्रिकोण है।सपा के लिए रामपुर और आजमगढ़ जीतना प्रतिष्ठा का सवाल है क्योंकि दोनों सीट पर उसका कब्जा है लेकिन अखिलेश यादव दोनों सीटिंग सीट पर एक बार प्रचार करने तक नहीं गए। जबकि बीजेपी से सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई नेता दोनों सीट पर जमकर प्रचार करते नजर आए हैं। आइए समझते हैं आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा सीट पर क्या है वोट-गणित।

आजमगढ़ में सपा को तगड़ी चुनौती, लोकसभा से विधानसभा चुनाव में सपा की लीड घटी है

दो सीटों में अगर एक सीट पर सपा कमजोर नजर आ रही है तो वो है अखिलेश यादव के इस्तीफे से खाली हुई आजमगढ़ लोकसभा सीट। यहां सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव का मुकाबला बीजेपी नेता और भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ और बीएसपी के शाह आलम उर्फ गुड्डू जलाली से है। दो यादवों के बीच में मायावती की बसपा ने एक अल्पसंख्यक कैंडिडेट देकर आजमगढ़ की लड़ाई में मुकाबले सस्पेंस भर दिया है।अखिलेश यादव ने 2019 का लोकसभा चुनाव करीब 2.59 लाख वोट के अंतर से जीता था। तब भी बीजेपी से निरहुआ ही लड़े और हारे थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा सीट की पांच विधानसभा सीटों गोपालपुर, सगरी, मुबारकपुर, आजमगढ़ और मेहनगर के वोट को मिलाकर सपा की लीड घटकर 1.06 लाख रह गई है। तीन साल में करीब डेढ़ लाख वोटर सपा के घटे हैं भले जिले की दस की दस सीट सपा ने जीत ली हो। अखिलेश यादव का ना जाना अगर आजमगढ़ को रास ना आया तो धर्मेंद्र यादव मुश्किल में पड़ सकते हैं।

रामपुर में सपा और भाजपा की सीधी लड़ाई, अखिलेश ने आजम खान के भरोसे छोड़ी लड़ाई

आजम खान के इस्तीफे से खाली रामपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी और एसपी की सीधी लड़ाई है जिसमें एक तरफ सपा के आसिफ रजा और दूसरी तरफ बीजेपी के घनश्याम सिंह लोधी हैं। लोधी पहले आजम खान के ही करीबी थे और सपा के नेता भी रहे हैं। अखिलेश यादव ने यह लड़ाई आजम खान के भरोसे छोड़ दी है जिसका सीधा मतलब यह है कि आपकी सीट है, आप ही निकालिए।रामपुर का वोट गणित ये है कि 2019 के चुनाव में आजम खान ने यह सीट 1.09 लाख वोटों के अंतर से जीती थी। 2022 के चुनाव में इस सीट के अंदर आने वाली पांच विधानसभा सीटों स्वार, चमरौआ, बिलासपुर, रामपुर और मिलक में कुल मिलाकर सपा की लीड बढ़कर 1.44 लाख हो गई है। जिले की पांच विधानसभा सीटों में तीन पर सपा और दो पर भाजपा का कब्जा हुआ है।

बसपा लोकसभा का उप-चुनाव इस सीट पर नहीं लड़ रही है। रामपुर में सपा के साथ-साथ आजम की प्रतिष्ठा भी दांव पर है जिसका जिक्र आजम अपने भाषण में करते भी रहे।

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