समतामूलक समाज का द्योतक है गणतंत्र

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 डॉ.शंकर सुवन सिंह आधुनिक स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय पर्व है-गणतंत्र दिवस। भारत मेंगणतंत्र दिवस की भूमिका बहुत अहम् होती है। इसी दिन संविधान कीस्थापना हुई। गणतंत्र दिवस भारतीयों की भावनाओ से जुड़ा हुआविशेष दिन है। गणतंत्र के 72 वर्ष पूरे हो गए हैं। आजादी के बाद देशको चलाने के लिए संविधान लिखा गया, जिसे लिखने में पूरे 2 साल11 महीने और 18 दिन लगे। 26 जनवरी 1950 ई• को सुबह 10:18मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया था और इसी उपलक्ष्य मेंहम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने लगे। 26 जनवरी1950 से पहले भारत संवैधानिक तौर पर गणराज्य नहीं बल्किराजतंत्र ही था। 26 जनवरी 1950 से पहले गर्वनमेंट ऑफ इंडियाएक्ट 1935 के तहत भारत में शासन चलाया जाता था। दिल्ली में 26जनवरी,1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड,राजपथ पर न होकरइर्विन स्टेडियम(आज का नेशनल स्टेडियम)में हुई थी। वर्ष 1955 ई•को दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस की पहली परेड हुई थी।गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पर परेड आयोजित की जाती हैऔर इस परेड की सलामी देश के राष्ट्रपति लेते हैं। हर साल 21 तोपोंकी सलामी दी जाती है। वर्ष 1950 ई• से हम गणतंत्र दिवस को हरवर्ष ढ़ेर सारे हर्ष और खुशी के साथ मनाते हैं। वर्ष 2022 में 73 वांगणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव के मौकेपर 17 जगुआर लड़ाकू विमान 75 के आकार में राजपथ के उपरआसमान में उड़ान भरेंगे। जिसका नजारा अद्भुत होगा। इसके अलावा73 वां गणतंत्र दिवस के मौके पर 16 मार्चिंग दल, 17 सैन्य बैंड औरविभिन्न राज्यों, विभागों और सशस्त्र बलों की 25 झांकियां प्रदर्शित कीजाएंगी। झांकी का मुख्य विषय ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ है, जोआजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में है। सबसे खास बात है किइस बार के परेड में दो परमवीर चक्र और एक अशोक चक्र पुरस्कारविजेता भी भाग ले रहे हैं। समारोह में भारतीय सेना की सिख लाइटइन्फेंट्री, राजपूत रेजिमेंट, जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फेंट्री, असम रेजिमेंट, आर्मी ऑर्डिनेंस कॉर्प्स रेजिमेंट और पैराशूट रेजिमेंट कार्यक्रम में अपनेकरतब दिखाएंगे। गणतंत्र दिवस समारोह में इस बार भी कोई विदेशीमेहमान या राष्ट्राध्यक्ष शामिल नहीं होगा। कोरोना के कारण इस बार भीगणतंत्र दिवस समारोह में किसी विदेशी मेहमानों को आमंत्रित नहींकिया गया। जबकि, गणतंत्र दिवस में विदेशी मेहमान को शामिल करनेकी शुरू से देश की परंपरा रही है। दो शब्दों से मिलकर बना है गणतंत्र- गण और तंत्र। गण का शाब्दिक अर्थ है दल/समूह/लोक। तंत्र काशाब्दिक अर्थ है डोरा/सूत (रस्सी)। अर्थात ऐसी रस्सी/डोरा,जो लोगोंके समूह को जोड़े,लोकतंत्र कहलाता है। अर्थात जनता के द्वारा जनताके लिए।भारत में लोकतंत्र है और राजनेताओं ने लोकतंत्र का आधार,आरक्षण को बना दिया है। भ्रष्ट प्रशासन, शिक्षा से लेकर न्याय तक काराजनैतिककरण होना,लोकतंत्रात्मक प्रणाली का जुगाड़ तंत्रात्मक होजाना आदि अन्य सामाजिक कुरीतियों ने जन्म ले लिया।25/08/1949 ई में संविधान सभा में अनुसूचित जाति,अनुसूचितजनजाति आरक्षण को मात्र 10 वर्ष तक सिमित रखने के प्रस्ताव परएस. नागप्पा व बी. आई. मुनिस्वामी पिल्लई आदि की आपत्तियां आई।डॉक्टर अम्बेडकर ने कहा मैं नहीं समझता कि हमे इस विषय में किसीपरिवर्तन की अनुमति देनी चाहिए। यदि 10 वर्ष में अनुसूचित जातियोंकी स्थिति नहीं सुधरती तो इसी संरक्षण को प्राप्त करने के लिए उपाएढूढ़ना उनकी बुद्धि शक्ति से परे न होगा। आरक्षण वादी लोग,डॉअम्बेडकर की राष्ट्र सर्वोपरिता की क़द्र नहीं करता। समाज एक सेअधिक लोगों के समुदायों से मिलकर बने एक वृहद समूह को कहते हैं, जिसमें सभी व्यक्ति मानवीय क्रिया-कलाप करते हैं। मानवीय क्रिया-कलाप में आचरण, सामाजिक सुरक्षा और निर्वाह आदि की क्रियाएंसम्मिलित होती हैं। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। मनुष्य सभी प्राणियों मेंसर्वश्रेष्ठ है। अन्य प्राणियों की मानसिक शक्ति की अपेक्षा मनुष्य कीमानसिक शक्ति अत्यधिक विकसित है। समाज रूपी मकान जब न्यायरूपी स्तम्भ पर खड़ा होता है तो ऐसा समाज सौम्यता, समानता औरशांति का प्रतीक होता है। न्याय, विश्व में शांति कायम करने का एकमहत्वपूर्ण अंग है। न्याय(जस्टिस) की बुनियाद सभी मनुष्यों को समानमानने के आग्रह पर आधारित है। न्याय अर्थात समानता का अधिकार।न्याय ही समाज में फैली तमाम तरह की बुराईयों और गैर-सामाजिकतत्वों पर लगाम लगाने उन्हें सजा देने तथा तमाम नागरिकों के नैतिकऔर मानवाधिकारों की रक्षा करता हैं। समाज में फैली भेदभाव औरअसमानता के कारण मानवाधिकारों का हनन लगातार होता रहा।भारत में अशिक्षा,ग़रीबी,बेरोजगारी,महंगाई और आर्थिक असमानताज्यादा है। इन्हीं भेदभावों के कारण न्याय बेहद विचारणीय विषय होगया है। डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर(15 जनवरी 1929 – 4 अप्रैल1968)अमेरिका के एक पादरी,आन्दोलनकारी(ऐक्टिविस्ट)एवंअफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक अधिकारों के संघर्ष के प्रमुख नेता थे। उन्हेंअमेरिका का गांधी भी कहा जाता है। मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि”जहां भी अन्याय होता है वहां हमेशा न्याय को खतरा होता है। यहबात केवल वैधानिक न्याय के बारे में ही सही नहीं है क्योंकि एकविवेकपूर्ण समाज से सदैव समावेशी प्रणाली के लियेरंग,नस्ल,वर्ग,जाति जैसी किसी भी प्रकार की सामाजिक बाधा से मुक्तन्याय सुनिश्चित करने की उम्मीद की जाती है ताकि समाज का कोई भीव्यक्ति अपने न्याय के अधिकार से वंचित न हो सके। किसी को भीन्याय से वंचित रखना न केवल सामाजिक न्याय के सिद्धांतों केखिलाफ है,बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के भी खिलाफ़ हैं। हिंसा केजरिये जोर जुल्म से बात मनवाना असहिष्णुता है। असहिष्णुता गुंडों केद्वारा की जाती है। असहिष्णुता से दृढ़ संकल्पित रूप से सामना करनेकी जरुरत है। रक्त से किसकी प्यास बुझती है,क्या आप जानते हैं? पिशाचों व पशुओं की, तुम तो फिर मनुष्य ही हो। असहिष्णुतागुंडाराज को चरितार्थ करती है। बोलने का अधिकार हमारा जन्मजातअधिकार है। यदि बोलना बंद कर दिया गया तो हमारी आवाज़ औरहमारे विचार सीमित हो जाएंगे। इसलिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद19(क) के अंदर हमें बोलने की स्वतंत्रता दी गई है। यह हमारा मौलिकअधिकार है। अतः हम इसे लेकर न्यायालय में भी जा सकते हैं।भारतीय संविधान में स्वतंत्रता का अधिकार मूल अधिकारों मेंसम्मिलित है। इसकी 19,20,21 तथा 22 क्रमांक की धाराएँ नागरिकोंको बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित 6 प्रकार की स्वतंत्रताप्रदान करतीं हैं। भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीयसंविधान में धारा 19 द्वारा सम्मिलित 6 स्वतंत्रता के अधिकारों में सेएक है। 19(क)वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता,19(ख)शांतिपूर्णऔर निराययुद्ध सम्मेलन की स्वतंत्रता,19(ग) संगम, संघ या सहकारीसमिति बनाने की स्वतंत्रता,19(घ) भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाधसंचरण की स्वतंत्रता,19(ङ)भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र कही भी बसजाने की स्वतंत्रता,19(छ)कोई भी वृत्ति,उप-जीविका,व्यापार याकारोबार की स्वतंत्रता। भारत में जो आपसी सौहार्द बिगाड़ने काप्रयास करे वह भारतीय कम व आतंकी ज्यादा है। मानवता,सहिष्णुताकी जननी है। सच्ची मानवता तब जन्मेगी,जब दुनिया से असहिष्णुतामिटेगी,जब दुनिया में लोगों को जीने की स्वतंत्रता होगी,जब दुनिया सेवहशीपन हटेगा,जब उगता सूरज सारे अँधेरे को लील जाएगा, जब शेरकी गर्जन से हिरन जान बचाकर नहीं भागेंगे, शेर पर भरोसा होगा तबदुनिया से बुराई का अंधकार छट जाएगा और सही मायने में सहिष्णुताका राज होगा। सहिष्णुता, समता पर आधारित होती है। समता अर्थातजिसमे विषमता का भाव न हो। समता अर्थात जहां शोषण न हो।भेदभाव रहित समाज ही समतामूलक समाज कहलाता है। अतएव हमकह सकते है कि भारतीय गणतंत्र समतामूलक समाज का द्योतक है।

लेखक

डॉ. शंकर सुवन सिंह

वरिष्ठ स्तम्भकार एवं विचारक

असिस्टेंट प्रोफेसर,शुएट्स,नैनी,प्रयागराज(यू.पी)

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