महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना को नौकर समझती थी भाजपा, संजय राउत ने साधा निशाना

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राउत ने कहा कि मेरा हमेशा से ही ये मानना रहा है कि महाराष्ट्र में सीएम शिवसेना का ही होना चाहिए। भले ही शिवसैनिक को कुछ न मिले, पर हम गर्व से ये तो कह सकते हैं कि महाराष्ट्र की सत्ता शिवसेना नेता के हाथ में है…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के बीच सौ मिनट चली बातचीत को हफ्ताभर भी नहीं बीता कि सिसासी बयानबाजियों का दौर शुरू हो गया है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि पिछली महाराष्ट्र सरकार में भाजपा का शिवसेना के लिए व्यवहार नौकरों जैसा था। दरअसल राउत शिवसेना कार्यकर्ताओं को अपने संबोधन में 2014-19 के बीच के समय की बात कर रहे थे। तब शिवसेना भाजपा के साथ महाराष्ट्र में सत्ता पर थी। जलगांव में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच राउत ने कहा, “राज्य में जो पिछली सरकार बनी थी, उसमें शिवसेना को दूसरे नंबर का दर्जा दिया गया था। हमारे साथ नौकर की तरह का व्यवहार किया जाता था। इतना ही नहीं, जिस पार्टी के समर्थन से भाजपा सत्ता में आई थी, उसी सत्ता का इस्तेमाल कर हमें खत्म करने की भी कोशिश की गई थी।’

उन्होंने कहा कि मेरा हमेशा से ही ये मानना रहा है कि महाराष्ट्र में सीएम शिवसेना का ही होना चाहिए। भले ही शिवसैनिक को कुछ न मिले, पर हम गर्व से ये तो कह सकते हैं कि महाराष्ट्र की सत्ता शिवसेना नेता के हाथ में है। महा विकास अघाड़ी सरकार इसी भावना के साथ गठित की गई थी। जो अजित पवार सरकार गठन के लिए भाजपा के साथ गए थे, वो आज हमारे गठबंधन के सबसे मजबूत प्रवक्ता हैं। बता दें कि देवेंद्र फडणवीस के साथ नवंबर 2019 में जब अजित पवार ने सरकार बनाई थी, तो वो केवल 80 घंटे ही चली थी। बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे आठ जून को प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ अजित पवार और अशोक चव्हाण भी थे। बंद कमरे में सौं घंटे बातचीत चलने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा था कि हम सियासी तौर पर साथ नहीं पर रिश्ते पुराने हैं। मोदी कोई नवाज शरीफ थोड़े हैं, जो मुलाकात छिपकर करता। इस मुलाकात के बाद सियासी अटकलें लग रही थीं कि भाजपा और शिवसेना एक बार फिर साथ हो सकते हैं। इसी दौरान संजय राउत ने कहा कि देश में अगर कोई टॉप लीडर है तो वो मोदी हैं। उन्होंने ये भी कहा कि 2014 के बाद से अब तक भाजपा को जो भी सफलता मिली है, उसकी वजह मोदी ही हैं।

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